Tuesday, May 27, 2025

लौट तो आया है मगर वो बात नहीं,


तू लौट तो आया है मगर वो बात नहीं,

जो टूटा है दिल, उसमें अब सौगात नहीं।

कहता है फिर से सब पहले जैसा होगा,

पर ऐ दोस्त, अब तुझ पे वो एहसास नहीं।


वक़्त ने सीखा दिया है धोखे की पहचान,

अब लौट आने से वफ़ा नहीं लौटा करती।

जो दिल तुझ पे लुटा था कभी बेझिझक,

अब तुझ पर यक़ीन की जगह नफ़रत पलती।


अगर चाहो तो मैं इसे किसी खास शैली (ग़ज़ल, दोहा, आदि) में या और भी तीखे अंदाज़ में ढाल सकता हूँ।